नई तकनीक का इस्तेमाल कर बचे हुए खाने से पशुओं के लिए पौष्टिक आहार बना रही Wastelink कंपनी

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आज के दौर में किसी भी तरह का वैस्टेज कारोबार के कई अवसर खोल रहा है. जो एक बड़े बिजनेस का रूप भी ले रहा है. इस फील्ड में कई बड़ी फर्म अब उभर कर सामने आ रही हैं. वहीं बढ़ते खराब खाने की समस्या को देखते हुए भी एक कंपनी ने नई पहल शुरू की है. इस कंपनी का नाम वेस्टलिंक (Wastelink) है. जिसके फाउंडर और सीईओ साकेत दवे (Saket Dave CEO on Wastelink) ने बचे हुए खाने की रीसाइक्लिंग की जरूरत महसूस की, और खराब खाने को उच्च प्रोटीन वाले पशु आहार में बदलने की तकनीक खोजी निकाली.
दरअसल, जब होटल, रेस्त्रां, ढाबों से व्यर्थ खाना इकट्ठा कर लैंडफिल में फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है, तो ये ग्रीनहाउस गैसों को निकालता है, जो हमारे वातावरण के लिए काफी नुकसानदायक है. वेस्टलिंक फर्म इन सभी सामग्री को इकठ्ठा कर उत्पादन करता है और उन्हें पशुओं के लिए पोषक तत्वों से भरपूर चारे में बदल देता है
भारत में भी अब वेस्टलिंक के इस कदम से चरवाहों को चारे की कमी की समस्या से बड़ा छुटकारा मिला है. हाई नूट्रिशन वाले इस फ़ीड में वे व्यर्थ भोजन शामिल होता है जो कूड़ा घर में धूल खा रहा होता है.
कंपनी के सीईओ साकेत दवे ने बताया कि हम जो कुछ भी करते हैं वह भोजन के अधिशेष को बदल देता है. जैसे-जैसे जनसंख्या और खाद्य उत्पादन बढ़ता रहेगा, वैसे ही भोजन की बर्बादी भी बड़े पैमाने पर होती रहेगी. यही वजह है कि खाद्य अपशिष्ट के स्थायी प्रबंधन की नए तरीके को प्रोत्साहित करना और इसके महत्व को समझना जरूरी है
लिहाजा, वेस्टलिंक कंपनी को खाद्य अपशिष्ट री-साइकल कर और खाद्य निर्माताओं को इसकी आपूर्ति करने का दोहरा लाभ मिलता है,
अन्न की बर्बादी का मतलब समझाते हुए कंपनी के CEO साकेत दवे ने बताया कि, इससे सिर्फ श्रम की बर्बादी ही नहीं होती, बल्कि पानी, ईंधन और बिजली भी बर्बाद होती हैं. इसीलिए, वेस्टलिंक खाद्य कंपनियों को जीरो वेस्ट बनाकर इसका हल करता है.
वेस्टलिंक कंपनी इस व्यर्थ भोजन को इकट्ठा करके और बदले में उन्हें पैसों से भुगतान करके इस समस्या का समाधान करता है. इस तरह जो पहले लागत थी वह अब उनके लिए राजस्व का माध्यम बन जाती है. साकेत दवे ने विस्तार से बताया कि हमारी फर्म पूरे साल देशभर में किसानों को सस्ती, हाई नूट्रिशन से युक्त पशु चारा उपलब्ध कराती है. कंपनी के CEO और फाउंडर के मुताबिक फ़ीड के लिए फार्मूला चारा पोषण विशेषज्ञों की ओर से विकसित किया गया है. जो पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है, और उन्हें स्वस्थ बनाता है. इससे किसान को बेहतर नतीजे मिलते हैं. भारत में सालाना करीब 150 मिलियन मीट्रिक टन वाणिज्यिक खाद्य अधिशेष री-साइक्लिंग के लिए उपलब्ध है.
साकेत दवे ने बताया कि हमारा लक्ष्य उस संख्या का एक बड़ा हिस्सा बढ़ाना और प्राप्त करना है. हमारा बिजनेस मॉडल अगले 12 महीनों में 10 गुना बढ़ने जा रहा है. जो न केवल खाद्य अपशिष्ट को खत्म करने में मदद करेगा, बल्कि संसाधनों की बर्बादी को रोकेगा, और खाद्य उत्पादकों को उनकी लागत को कम करने में सहायता करेगा

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