यूपी समेत पाँच राज्यों में चल रहे चुनावी माहौल में राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए जमकर वादे कर रहे हैं. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. मंगलवार को इस याचिका पर टॉप कोर्ट में सुनवाई हुई. SC की ओर से कैश और मुफ्त उपहार देने के वादा किए जाने को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब मांगा है.
दरअसल, ऐसे वादे करने वाले राजनीतिक दलों का चुनाव चिह्न जब्त करने या उनकी मान्यता रद्द करने का दिशा-निर्देश देने का अनुरोध करने वाली ये जनहित याचिका भाजपा के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है.
कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय को भी याचिका में केवल दो पार्टी के ही नाम शामिल करने को लेकर खरी खोटी सुनाई. चीफ जस्टिस वी एन रमण, जस्टिस ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने सवाल उठाया कि, जब तमाम राजनैतिक दल ऐसे ही फ्री गिफ्ट देने का वायदा कर रहे हैं तब आपने सिर्फ दो ही पार्टियों का जिक्र याचिका में क्यों किया, बाकियों का क्यों नही?
कोर्ट ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि, ये गंभीर मामला है. जो चुनाव को प्रभावित करता है, लेकिन अदालत के दखल का दायरा बहुत सीमित है. कोर्ट ने आगे कहा कि हमने चुनाव आयोग को इस पर गाइडलाइंस बनाने को कहा लेकिन इलेक्शन कमीशन ने महज एक मीटिंग की. उसका नतीजा क्या रहा, ये पता नहीं?. अब SC ने इस जनहित याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है.
