बंगाल में BJP का 35 लोकसभा सीटें जीतने का टारगेट, 2019 से कितना अलग होगा 2024 का चुनाव

राजनीति
बीजेपी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पश्चिम बंगाल पर काफी फोकस कर रही है. इसके लिए पार्टी ने रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर 15 सदस्यीय चुनाव प्रबंधन समिति का गठन कर दिया है और 2024 में 35 लोकसभा सीटें जीतने का टारगेट रखा है.

लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपने सियासी विस्तार की संभावनाओं को देख रही है और नंबर दो की पार्टी से नंबर बन बनने की जुगत में है. बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को 2024 के चुनाव में बंगाल में 35 लोकसभा सीटें जीतने का टारगेट रखा है. अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मिशन-बंगाल के लिए बीजेपी ने 15 सदस्यीय चुनाव प्रबंधन समिति का गठन कर दिया है. ममता बनर्जी के मजबूत दुर्ग को भेदने के लिए 31 दिसंबर को राज्य के सभी सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के साथ बैठक होनी है, जिसमें 35 सीटें जीतने की रूपरेखा तैयारी की जाएगी.

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें जीतने में कामयाब रही थी जबकि 2014 में महज दो सीटें ही जीती थी. 2021 विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर बीजेपी पश्चिम बंगाल में भले ही मुख्य विपक्षी दल बनने में कामयाब रही ही, लेकिन उसके बाद से हालत बदले हैं. बीजेपी को एक के बाद एक बड़े झटके लगे हैं. चुनाव से पूर्व टीएमसी से बीजेपी में आए कई नेताओं ने घर वापसी की, जिसके बाद से ममता बनर्जी के हौसले बुलंद हैं और टीएमसी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में क्या 35 सीटें जीतने में कामयाब हो पाएगी?

 

बंगाल की 35 सीटों पर बीजेपी की नजर

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल राज्यों में पश्चिम बंगाल शामिल है. बंगाल में सत्ता की हैट्रिक लगा चुकीं ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA का अहम हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस और लेफ्ट भी शामिल है. ममता बनर्जी बंगाल में क्लीन स्वीप करने के मकसद से काम कर रही हैं तो बीजेपी ने 2024 के चुनाव में बंगाल में इस बार 35 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है. इस लिहाज से इस पर काम भी शुरू हो गया है. बीजेपी ने बंगाल में जीत के लिए रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है. इसी लिहाज से अमित शाह और जेपी नड्डा ने बंगाल का दौरा करके 2024 के लोकसभा चुनाव जीतने की पठकथा लिखी है.

अमित शाह ने शीर्ष नेताओं के साथ की बैठक

अमित शाह-जेपी नड्डा ने मंगलवार को कोलकत्ता में बंद कमरे में बंगाल बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक किया और उन्हें 35 सीटें जीतने का टारगेट दिया. आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी की कोशिश इस लक्ष्य तक पहुंचने की होगी, जिसके लिए उन्होंने प्लान भी बनाया है. शाह ने कहा, ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि से पीएम मोदी को 35 सीटें दें, मैं गारंटी देता हूं कि पीएम सोनार बांग्ला बनाएंगे. उन्होंने कहा अगर हम शून्य से 77 सीटें हासिल कर सकते हैं (2021 के विधानसभा चुनावों में) तो हम दो-तिहाई बहुमत के साथ भी सरकार बना सकते हैं. बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने का मतलब घुसपैठ, पशु तस्करी और सीएए के माध्यम से धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों की नागरिकता को समाप्त करना होगा.

बंगाल में कभी सत्ता में नहीं आई BJP

बीजेपी के लिए बंगाल क्यों अहम है, इसे समझना जरूरी है. देश में 40 से अधिक लोकसभा सीटों वाले चार राज्य हैं और बंगाल इनमें इकलौता ऐसा राज्य है, जहां बीजेपी कभी सत्ता में नहीं रही. आमतौर पर माना यही जाता है कि अगर देश की सत्ता में बने रहना हो तो किसी भी राष्ट्रीय दल का ऐसे कम से कम दो राज्यों में दबदबा होना ही चाहिए. इसके अलावा बंगाल चुनाव के अहम होने की एक वजह इतिहास और विचारधारा से है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1946 में बंगाली हिंदू होमलैंड मूवमेंट शुरू किया था. बंगाल से आरएसएस-बीजेपी के भावनात्मक लगाव की वजह बंगाल का विभाजन. बंगाल की सियासत में लेफ्ट लंबे समय तक काबिज रहा है, जिसका वैचारिक स्तर पर संघ के साथ छत्तीस के आंकड़े हैं. यही वजह है कि बीजेपी का फोकस जनसंघ के दौर से बंगाल पर है.

बंगाल फतह करने की जुगत में BJP

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से बीजेपी बंगाल पर अपना ध्यान केंद्रित कर रखी है. बीजेपी के सामने चुनौती यह दिखाने की भी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में उसे 18 सीटें यूं ही नहीं मिल गई थीं. बीजेपी को साबित करना है कि लोकसभा चुनाव में उसका धमाकेदार प्रदर्शन बंगाल की राजनीति में आगाज था एक बड़े बदलाव का, जिसे अब 2024 के चुनाव में बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. बीजेपी बंगाल में मुद्दा बना रही है कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू न किए जाने का और अवैध प्रवासियों. बीजेपी का राज्य में विस्तार ऐसे लोकल नेताओं के दम पर हुआ है, जो विरोधी खेमों से उसके साथ आए थे.

बंगाल में कम से कम 20-25 प्रभावशाली नेता विपक्षी खेमे से बीजेपी के पाले में आए थे, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी से आए नेताओं का बीजेपी से मोहभंग हुआ है. बीजेपी की सत्ता में न आने के बाद उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति विश्वास जताते हुए घर वापसी किया. ममता बनर्जी ने भी खुद को राज्य की राजनीति में मजबूत किया है. राज्य से वामपंथी दलों और कांग्रेस का करीब-करीब पूरी तरह सफाया हो चुका है. इस तरह से बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ममता बनर्जी ही हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA का हिस्सा हैं. ममता बनर्जी बंगाली अस्मिता से खुद को जोड़ती रही है. विपक्षी गठबंधन के साथ होने से वोटों का बिखराव की संभावना बहुत की हम दिख रही है.

15 सदस्यीय कोर कमेटी गठित

पश्चिम बंगाल में 2024 का चुनाव बीजेपी के लिए कोई साधारण चुनाव नहीं रह गया है. यह बात बीजेपी बाखूबी तरीके से समझ रही है. 2024 चुनाव से पहले ही बीजेपी बंगाल में खुद को नबंर वन पार्टी बनाने के मिशन पर काम शुरू कर दिया है. बीजेपी ने चुनावी रणनीति और सियासी जंग फतह करने के लिहाज से 15 सदस्यीय कोर कमेटी गठित की है, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल, अमित मालवीय, आशा लाकड़ा और मंगल पांडे, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, सांसद दिलीप घोष और वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा शामिल हैं.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले ही बीजेपी के सभी नेताओं को पहले ही कह दिया है कि वह लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी पहले से ही शुरू कर दें. अमित शाह को यह पता है कि लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रास्ता तय किया जा सकता है. वह इसी रणनीति के तहत बंगाल में किसी तरह की चूक नहीं चाहते हैं, जिसके लिए खुद ही कमान फिर से संभाल ली है.

आदिवासी वोटों पर BJP की नजर

बता दें कि बीजेपी ने साल 2014 में मोदी लहर में भी पश्चिम बंगाल में महज 2 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि 34 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ने जीत हुई थी. हालांकि, साल 2019 के चुनाव में बीजेपी को 18 सीटें हासिल हुई. पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में भी टीएमसी को बड़ी सफलता मिली और 292 सीट पर हुए विधानसभा चुनाव में 213 सीट टीएमसी के खाते में आई. जबकि 77 सीटें बीजेपी को हासिल हुई. इस परिणाम को देखते हुए बीजेपी ने महसूस किया कि उन्हें बंगाल में अभी और मेहनत करने की जरूरत है, लेकिन बंगाल के सियासी समीकरण बीजेपी की राह में बाधा बन रही है. राज्य में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता है तो 70 फीसदी हिंदू. बीजेपी की नजर आदिवासी वोटों को अपने साथ करने की है, जिसके लिए बीजेपी मशक्कत कर रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *