महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन का सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय, बड़े भाई की भूमिका में उद्धव!

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बिहार, दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों में इंडिया गठबंधन सीट बंटवारे पर काम कर रही है. आज इस कड़ी में महाराष्ट्र में एक अहम बैठक होनी है. राज्य में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं. शिवसेना उद्धव गुट की मांग है कि उसे 23 सीटें दी जाएं. कांग्रेस हालांकि इतनी सीट देने को तैयार नहीं नजर आ रही. सूत्रों की मानें तो एक फॉर्मूले पर हालांकि सहमति बनी है. आईये जानते हैं वह क्या है.

शिवसेना उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर मंगलवार को दिल्ली में चर्चा होगी. बैठक कांग्रेस पार्टी के गठबंधन समिति के संयोजक मुकुल वासनिक के घर लगभग 4 बजे होगी जिसमें शिवसेना उद्धव गुट की तरफ से संजय राउत और विनायक राउत बैठक में हिस्सा लेंगे.

इसके पहले शिवसेना उद्धव गुट ने संकेत दिए कि वह 23 लोकसभा की सीटों पर अपना दावा पेश करेगी. इतनी सीटो पर ही 2019 में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में शिवसेना ने चुनाव लड़ा था. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है और वह खुद के लिए ज्यादा सीटें मांग रही है.

शिवसेना उद्धव गुट की ताकत अब उतनी नहीं

शिवसेना उद्धव गुट का तर्क है की भाजपा के साथ पिछले चुनाव में चूंकि वो 23 सीटों पर लड़ी थी जिसमें से 18 पर उसने जीत दर्ज किया था. इसलिए कम से कम इतने पर उसकी दावेदारी तो बनती ही है. हालांकि, एक तथ्य यह भी है कि शिवसेना में टूट के बाद 13 सांसद एकनाथ शिंदे के साथ चले गए हैं और आज के दिन शिवसेना उद्धव गुट की ताकत उतनी नहीं है जो पहले थी. कांग्रेस इसी बात का फायदा उठाना चाहती है.

48 सीटों का बंटवारा इस तरह होगा?

कांग्रेस 18 सीटें मांग रही है जबकि एनसीपी भी 18 सीटों पर दावा कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, 17-19 सीटें शिवसेना को जबकि 13-15 एनसीपी को, वहीं 12-14 सीट कांग्रेस को देने पर सहमति बन सकती है. एनसीपी के संबंध में हालांकि यह होगा कि उसे अपनी सीटों में से प्रकाश अंबेडकर, शेतकारी संगठन को 2-3 सीटें देनी होगी. महाराष्ट्र में कुल 48 सीटें लोकसभा की हैं.

2019 लोकसभा चुनाव परिणाम

2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था. भाजपा 23 सीटें जीतने में सफल रही थी. शिवसेना ने इस चुनाव में कुल 23 सीटों पर बीजेपी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था. शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पर पार्टी केवल 1 ही सीट जीत सकी थी. कांग्रेस की साझेदार एनसीपी ने वहीं 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें पार्टी ने 4 पर जीत दर्ज की थी. वहीं एआईएमआईएम के उम्मीदवार 1 सीट पर जबकि निर्दलीय उम्मीदवार की जीत 1 सीट पर हुई थी.

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