विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा झटका दे दिया है. लोकसभा चुनाव(Lok Sabha Election 2024) से पहले विपक्ष लगातार बैलेट पेपर से चुनाव हो और वीवीपैट(vvpat) पर्चिय़ो का ईवीएम मत़ो से मिलान की मांग उठाता रहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने शुक्रवार को सभी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम मतों से मिलान करने और बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की सभी याचिकाएं खारिज कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब साफ हो गया है कि देश में चुनाव इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन से ही होंगे। बैलेट पेपर से मतदान नहीं होगा। अब यह भी स्पष्ट हो गया है कि ईवीएम से वीवीपैट पर्ची की 100 प्रतिशत क्रॉस-चेकिंग भी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई के बाद जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने कहा कि हमने प्रोटोकॉल और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है। इसके बाद हमने एक मत से यह फैसला दिया है।
इससे पहले दो दिन की लगातार सुनवाई के बाद पीठ ने 18 अप्रैल को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, बुधवार को शीर्ष कोर्ट ने इस मामले को फिर से सूचीबद्ध किया था। तब शीर्ष कोर्ट ने अदालत से चुनाव आयोग से कुछ बातों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुरक्षित रखते हुए शीर्ष कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह चुनाव को नियंत्रित नहीं कर सकता, न ही एक सांविधानिक निकाय के लिए नियंत्रक अथॉरिटी के रूप में कार्य कर सकता है। गलत काम करने वाले के खिलाफ कानून के तहत नतीजे भुगतने के प्रावधान हैं। कोर्ट सिर्फ संदेह के आधार पर परमादेश नहीं दे सकता।
अदालत ने कहा कि वह मतदान मशीनों के फायदों पर संदेह करने वालों और मतपत्रों पर वापस जाने की वकालत करने वालों की विचार प्रक्रिया को नहीं बदल सकती। इसके अलावा बुधवार को फैसला सुरक्षित रखते हुए पीठ ने उप चुनाव आयुक्त नितेश व्यास को कोर्ट में बुलाकर पांच मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा था। कोर्ट ने कहा, हमने ईवीएम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल देखे हैं। हम तीन-चार चीजों पर स्पष्टीकरण चाहते हैं। हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते बल्कि अपने निर्णय में दोहरा सुनिश्चित होना चाहते हैं और इसलिए यह स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। पीठ ने जिन पांच सवालों के जवाब मांगे थे उनमें यह भी शामिल था कि क्या ईवीएम में लगे माइक्रोकंट्रोलर रिप्रोग्रामेबल हैं।
विपक्ष के साथ -साथ सुप्रीम कोर्ट के वकील भी यह मांग उठाते रहें, लेकिन याचिका अब खारिज हो चुकी है. अब देखना होगा कि आगे क्या होता है.
