लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण का प्रचार आज खत्म हो गया है और कल 26 अप्रैल को मतदान होने हैं , लेकिन जैसे चुनाव आगे बढ रहा है प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस पर मुस्लिम पार्टी होने इंलजाम लगा रहें है. प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में चुनाव प्रचार करते हुए कहा कि कांग्रेस राज में हनुमान चालीसा सुनना गुनाह है .
दस साल सत्ता में रहने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव जीतने के लिए फिर से हिन्दु- मुसलमान करना पड रहा है. दरअसल दूसरे चरण के प्रचार के लिए मोदी राजस्थान में सभा को संभोधित कर रहे थे. कर्नाटक का हवाला देते हुए कहते हैं “कि कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में एक दुकानदार को इसलिए पीटा गया क्योंकि वह हनुमान चालीसा सुन रहा था, तो बात साफ है कि कांग्रेस के राज में हनुमान चालीसा और अपनी आस्था का पालन करना मुश्किल है.”
आगे उन्होने बोला कि “जब कांग्रेस को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रठ दिया तो कांग्रेस वालो ने उसे ठुकरा दिया तो उनके चेले भी हनुमान चालीसा सुनने और करने वालों को पीटेंगे ही.”
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर पत्रकार रवीश कुमार एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखते हैं कि” माननीय प्रधानमंत्री जी, क्या आप बिल्कुल ही एक भाषण बिना इस तरह के झूठ के नहीं दे सकते? हमने तो बचपन से तमाम दलों की सरकारों में कभी नहीं देखा कि हनुमान चालीसा पढ़ने से रोका जा रहा है। हनुमान मंदिरों में सुबह-शाम मधुर आरती होती रही है। जगह-जगह पर असंख्य हनुमान मंदिर बने हैं और लोग चालीसा पाठ करते रहे हैं। तमाम हाउसिंग सोसायटी में मंदिर बने हैं। मंदिर ही बने हैं। आपके प्रधानमंत्री बनने के पहले से बनते रहे हैं। आप इस तरह का झूठ कहाँ से लाते हैं कि कांग्रेस के राज में हनुमान चालीसा पढ़ने नहीं दिया जाता था।
कभी तो जनता के बीच सच बोल दीजिए। आप हनुमान जी के नाम पर भी झूठ बोल सकते हैं ? आज भी आपकी कई सभा होगी। कम से कम एक सभा में आप एलान कर दीजिए कि मैं किसी धर्म का नाम नहीं लूँगा। पूजा पाठ, मंदिर, भगवान का नाम नहीं लूँगा, केवल अपने काम पर बोलूँगा। आपकी सरकार ने कई पैम्फलेट छपवाए होंगे, वही पढ़ दीजिए। कम से कम अपनी पार्टी का मेनिफेस्टो ही पढ़ दीजिए। कोशिश तो कीजिए। हो जाएगा। फिर भी नहीं होता है तो राहुल गांधी का ही कोई भाषण लेकर पढ़ दीजिए। कोशिश तो कीजिए, हो जाएगा। क्या कल के अख़बार में हम ऐसी हेडिंग देख सकते हैं कि मोदी के भाषण से मंदिर मुसलमान ग़ायब, भाषण में कुछ नहीं था।”
