Cold Wave In North India: उत्तर भारत में सर्दी का सितम जारी- पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढ़ी ठंड, ठिठुर रही दिल्ली

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उत्तर भारत (NORTH INDIA) हाड़ कपा देने वाली सर्दी से सहमा हुआ है. पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर दिल्ली समेत उत्तर भारत तमाम राज्यों में दिख रहा है. बर्फीली हवाओं की वजह से देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है. मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, रविवार को दिल्ली के लोधी रोड में सबसे कम 3.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था. जो सामान्य से 3.4 डिग्री कम रहा. जबकि बुधवार को ये मिनिमम टेम्प्रेचर 5 डिग्री रहने का आसार है, जबकि अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रह सकता है.
हालांकि, गुरुवार से राजधानी में गिरते पारे से छुटकारा मिलने की उम्मीद है. इतनी सर्दी के बावजूद भी दिल्ली में प्रदूषण से निजात नहीं मिल रही है. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का ओवर ऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया. SAFAR की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में AQI 385 रहा. जबकि नोएडा में AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है और यह 507 दर्ज किया गया है.
वहीं, उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड के बीच राजधानी लखनऊ में न्यूनतम तापमान दो दिनों से छह डिग्री के करीब है. लखनऊ में जानवरों को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए जू में हीटर लगाए गए हैं. वहीं पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में तापमान माइनस में पहुंच गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में लेह का मिनिमम टेम्प्रेचर 12.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. IMD के वैज्ञानिक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि, अगले दो दिनों तक शीत लहर का प्रकोप और तेज हो सकता है. 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं उत्तर भारत में ठंड का कहर और बढ़ाने वाली हैं.

क्या है उत्तर भारत में अचानक ठंड बढ़ने का कारण?
विशेषज्ञों की मानें तो भारत में इस साल भीषण ठंड के पीछे एक वजह ‘ला नीना’ का प्रभाव है. अमेरिकन जियोसाइंस इंस्टिट्यूट के मुताबिक, अल नीनो और ला नीना शब्द का संदर्भ प्रशांत महासागर की समुद्री सतह के तापमान में समय-समय पर होने वाले बदलावों से है. इसका प्रभाव दुनिया भर में मौसम पर पड़ता है. सीधे शब्दों में समझा जाए, तो अल नीनो की वजह से तापमान गर्म होता है और ला नीना के कारण ठंडा. दोनों आमतौर पर 9-12 महीने तक रहते हैं, लेकिन असाधारण मामलों में कई वर्षों तक रह सकते हैं.

भारत पर कैसे पड़ रहा ला नीना का असर?
ला नीना की वजह से ही पूर्व में स्थित रूस के साइबेरिया और दक्षिण चीन की ठंडी हवाएं भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ आती हैं. इन हवाओं का असर ऐसा होता है कि कई बार दक्षिण भारत के राज्यों में भी तापमान सामान्य से कुछ नीचे चला जाता है. सर्दी के मौसम में उत्तर में ला नीना की वजह भारत के उत्तरी क्षेत्र से लेकर अफगानिस्तान, ईरान और हिंदू-कुश की बर्फीली पहाड़ियों तक ला नीना भयंकर ठंड पैदा करती हैं.

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