Subharti Medical College Meerut Suicide Case: उत्तर प्रदेश का वो क्रांतिकारी शहर मेरठ जहां से 1857 में फूटी आजादी की चिंगारी ने फिरंगियों के होश उड़ा दिया थे. लेकिन शहीदों की इस सरजमीं पर अब बच्चियां महफूज़ नहीं हैं. इस धरती पर ऐसा समाज पैदा हो रहा है जो एक बेबस, लाचार, बच्ची के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध तक नहीं करता… मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज (Subharti Medical College) से जो खबर आई है उसने अपनी बेटियों के मोहब्बत करने वाले हर परिवार को परेशान कर दिया है. दरअसल, सुभारती यूनिवर्सिटी में BDS सेकेंड ईयर की हौनहार छात्रा वानिया शेख़ (Wania Sheikh) ने छेड़-छाड़ से तंग आकर मौत को गले लगा लिया. वानिया शेख की क्लास में पढ़ने वाला सिद्धांत कुमार पंवार उसे पिछले 10-15 दिनों से तंग कर रहा था. उसके साथ बदसलूकी की जा रही थी. जिसका वानिया लगातार विरोध भी कर रही थी.
19 अक्टूबर के दिन बात हद से पार चली गई. उस दिन आरोपी ने वानिया को पूरी क्लास के सामने बदनियती और गलत तरीके से छूने की कोशिश की. सिद्धांत ने वानिया को सबके सामने पकड़ लिया, उसका हाथ मरोड़ा और भरी भीड़ में कई थप्पड़ जड़ दिये. अपने घर की इकलौती बेटी वानिया को उसके साथ हुई इस हरकत पर काफी बेईज्जती महसूस हुई जिसे वो सहन नही कर पाई. उसी वक्त वानिया शेख लाइब्रेरी की चौथी मंजिल की छत पर गई औऱ वहां से छलांग लगा दी. छात्रा के कूदने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. वानिया को यूनिवर्सिटी के अस्पताल में ही भर्ती कराया गया. 48 घंटे वो जिंदगी की जंग लड़ती रही. डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा को बचाने की पूरी कोशिश की गई. उसकी रीढ़ की हड्डी में दो फ्रैक्चर थे और खून का रिसाव ज्यादा हो गया था. जिस वजह से उसे बचाया नहीं जा सका, और अपने परिवार की इकलौती, चहेती और लाडली औलाद वानिया शेख मौत की आगोश में चली गई.
पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर छोटी-मोटी धाराओं में मामला दर्ज किया. मगर कुछ छात्रों और परिवार के लोगों ने जब इसका विरोध किया तो फिर पुलिस ने कई गंभीर धाराएं लगाते हुए सिद्धार्थ पवार को गिरफ्तार कर लिया. उसे अदालत में पेश किया गया. अब सिद्धार्थ को 14 दिन की कस्टडी में जेल पहुंचा दिया गया है. इस हादसे में कॉलेज प्रबंधन की भी गलतियां सामने आ रही हैं. पूरे कॉलेज कैंपस में सिक्योरिटी गार्ड सिर्फ जेंट्स है लेडीज गार्ड नहीं है. वहीं किसी भी बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर जाने के लिए एक दरवाजा होता है जो लॉक होता है जो कभी कबार खोला जाता है मगर वो दरवाजा खुला हुआ था इसके आलावा ये सब बातें कॉलेज प्रबंधक को पहले से पता थी जिनपर पर्दा डाला गया.
अब इस खबर पर चारों तरफ चुप्पी नजर आ रही हैं. समाज चुप है , मीडिया चुप है, नेता चुप है, क्यों कि इस घटना का कॉम्बिनेशन दरअसल जरासा उल्टा है. वानिया असद शेख के लिए कौन बोलेगा?. अगर इस घटना का कॉम्बिनेशन पिशाच बन चुकी गोदी मीडिया के हिसाब से होता तो तमाम चैनलों पर पैनल डिस्कशन और ब्रेकिंग न्यूज चला रही होती. कथित सिविल सोसायटी सड़कों पर होती और सरेआम आरोपी को फांसी की सज़ा देने की मांग कर रही होती. बदकिस्मती से वो उर्दू नाम वाली वानिया असद शेख थी. इस घटना को कुछ मीडिया पोर्टल ने मामूली झगड़ा बता कर इसे दबाने की कोशिश भी की हैं. और कई बड़े पोर्टल तो इस खबर पर खामोश हैं.
जरा एक बार सोचिये, अगर मामला मदरसे का होता तो गोदी मीडिया ब्रेकिंग न्यूज चला रही होती कि “मदरसे में यौन उत्पीड़न कब तक ?”, “कितनी वानिया शेख मदरसे की भेंट चढ़ेंगी ?”. नाक फुलाते नफरती नेता मदरसे के खिलाफ आग उगल रहे होते, मदरसे में ऐसी तमाम घटनाओं की झूठी सच्ची कहानी गढ़ी जा रही होती, मगर यहां मामला “सुभारती कालेज” का है और आरोपी सिद्धार्थ सिंह पंवार है तो सब चुप हैं. कल इसी सिद्धांत को संस्कारी बता कर रिहा भी कर दिया जाए तो बड़ी बात नहीं है… इस समाज में बिल्किस बानो हों या वानिया शेख अंजाम अफसोसनाक ही होता हैं.
