Gujarat Morbi Bridge हादसे पर सुधीर चौधरी की बेशर्मी, चारों तरफ़ हो रही थू-थू!

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Sudhir Chaudhary on Morbi Bridge: जब पूरा देश गुजरात के मोरबी में पुल टूटने के एक हादसे में करीब 150 लोगों के मारे जाने का शोक मना रहा है. उस वक्त गोदी मीडिया के एंकर सुधीर चौधरी (Sudhir chaudhary Aajtak) कह रहे है कि, पुल के गिरने के लिए लोग भी जिम्मेदार हैं. सरकार की नाकामी को छिपाने के लिए अपनी भद्दी पत्रकारिता के मेकअप को पोत रहे हैं. दरअसल, सत्ता के हाथों नीलाम हो चुकी गोदी मीडिया कई दिनों से अपना पूरा दिमाग और ताकत इसमें लगा रही है कि सरकार को किन तर्कों से बचाया जा सकता है. कैसे सरकार की नाकामी को औरों के सिर मंढा जा सके. इसीलिए, सुधीर चौधरी पुल गिरने का गुजरातियों को बता रहे हैं.

सुधीर चौधरी ये साबित करने की कोशिश में जुटे हैं कि, हादसे में 140 से ज्यादा मौतों की जिम्मेदार जनता है इसमें सरकार और प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नही है. अब आप याद कीजिए बंगाल चुनाव के दौरान 31 मार्च 2016 को कोलकाता में एक फ्लाईओवर गिर गया था. इस हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी. चुंकि तब वहां ममता बनर्जी की सरकार थी तो इन्हीं सुधीर चौधरी ने ब्रिज गिरने पर पश्चिम बंगाल की सरकार और सीएम ममता बनर्जी को जवाबदेह ठहराया था. आप सोचिए अभी तक सैकड़ों चिताओं की आग शांत भी नहीं होगी, और इन कथित पत्रकार ने मरे हुए लोगों को ही दोषी बना दिया. आप कल्पना कीजिए कि, मौजूदा दौर की पत्रकारिता की सत्ता के साथ सांठ – गांठ कितनी गहरी है. ये लोग तो सत्ता की गोदी का बच्चा बने बैठे है. बल्कि कई मायनों में तो सत्ताधीशों से भी नीचे गिरने की होड़ में लगे है.

अब सुधीर चौधरी से जनता को ये सवाल करना चाहिए कि, पुल गिरने के लिए लोग कैसे जिम्मेदार हैं. क्या लोग अपनी मर्जी से पुल पर घूमने गए थे. जबकि सरकार ने बाकायदा लोगों के घुमने के लिए पुल का उद्धघाटन किया था. पुल पर जाने का 12 रुपये का टिकट लोगों ने कटवाया. इस पुल पर जो गार्ड लगे थे उनकी मर्जी से ही लोगों ने एंट्री की होगी. इसमें बेकसूर जनता कैसे जिम्मेदार हुई. अगर सुधीर चाटुकारिता ना करके पत्रकारिता करते तो उन्हें पूछना चाहिए था कि, मरम्मत के बाद 5 दिन पहले खुला पुल क्यों गिरा?. बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के पुल को कैसे खोल दिया गया?. 100 की क्षमता वाले पुल पर भीड़ कैसे जमा हो गई 400 से अधिक लोग वहां कैसे पहुंच गए?. भीड़ को काबू करने में लोकल मैनेजमेंट के क्या इंतजाम थे?. पुल पर पहुंचे लोगों को रोका क्यों नहीं गया?.

खैर ये सवाल पूछने की हिम्मद सुधीर चौधरी तो छोड़िए गोदी मीडिया के किसी एंकर या रिपोर्टर की नहीं है. उन्हें पता है कि सवाल नौकरी पर भारी पड़ेंगे. इनमें से कोई इस एक्ट ऑफ फ्रॉड पर सवाल नहीं उठा सकता. अब सुधीर चौधरी की भद्दी पत्रकारिता की इस ‘एक्ट ऑफ चाटुकारिता’ पर क्या कहते हैं आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

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