बिलकिस बानो (Bilkis Bano) केस में 5 दोषियों ने सरेंडर करने की तारीख बढ़ाने की मांग की है. इन सभी ने अलग-अलग कारण गिनवाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से अपील की है. बिलकिस बानो के गैंगरेप और उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों की सजामाफी को सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को निरस्त कर दिया था. कोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर इन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश के मुताबिक 22 जनवरी तक इन्हें सरेंडर करना है. अब तक पांच दोषी इस डेडलाइन में राहत मांग चुके हैं.
किसने क्या कहा?
1- गोविंदभाई नाई का कहना है कि उसके पिता 88 साल के हैं और मां 75 साल की. दोनों गोविंद पर ही निर्भर हैं. इसलिए उसे कुछ दिन की और मोहलत दी जाए.
2- रमेश रूपाभाई चांदना का कहना है कि उसके बेटे की शादी है. शादी की तैयारियां करनी हैं. इसलिए कुछ समय और चाहिए.
3- मितेश चमनलाल भट का कहना है कि सर्दी की फसल कटने के लिए तैयार है. फसल काटने के लिए समय दिया जाए.
4- चौथे दोषी प्रदीप रमनलाल मोधिया ने बताया है कि हाल ही में उसके लंग्स की सर्जरी हुई है. सेहत में सुधार होने तक उसे मोहलत दी जाए.
5- पांचवें दोषी बिपिनचंद कन्हैयालाल का कहना है कि हाल ही में उसके पैर का ऑपरेशन हुआ था, जिसकी वजह से वो आंशिक तौर पर विकलांग हो गया है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की बेंच के सामने आया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार से इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ के सामने पेश करने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई रद्द कर दी थी
इस साल 8 जनवरी को बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 दोषियों की रिहाई का आदेश रद्द कर दिया है. गुजरात सरकार के आदेश को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की तकलीफ को समझना जरूरी है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध का अहसास होने के लिये सजा दी जाती है.
गैंगरेप केस में उम्रकैद की सजा पाए सभी 11 दोषी 15 अगस्त 2022 को रिहा हो गए थे. गुजरात सरकार ने कहा था कि सभी दोषियों को ‘अच्छे व्यवहार’ के कारण रिहा किया गया है.
