Lok Sabha Election 2024 में पहले चरण के मतदान हो गए हैं जिसके बाद पक्ष हो या विपक्ष दोनों अपनी जीत का दावा कर रहें हैं, लेकिन सबका साथ, सबका विकास की बात करने वाले प्रधानमत्री मोदी (PM Modi) ने फिर से चुनाव में हिन्दु- मुस्लिम का राग अलापना शुरु कर दिया है. लेकिन वह चुनाव आयोग (Election Commission) जो चुनाव से पहले यह कहता है कि जो भी नेता जाति , धर्म के आधार पर जनता से वोट मांगेगा उसे खिलाफ हम सख्त कार्यवाही करेंगे, वह चुनाव आयोग गायब दिख रहा है .
पहले चरण के चुनाव होने के बाद से भाजपा कहीं ना कहीं हताश दिख रही है, यही कारण है कि भाजपा के वरिष्ट नेता बूथ स्तर पर चुनाव की रणनीति बनाने की बात कर रहें है, यही हताश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में दिख रही है.
दरअसल, 21 अप्रैल को नरेंद्र मोदी ने राजस्थान में जनता को संबोधित करते हुए विवादित भाषण दिया. मोदी ने दावा किया कि कांग्रेस ने देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों को दिया है. अपने संबोधन में उन्होंने मुस्लिमों को ‘घुसपैठिया’ भी कह डाला.
जिस पर पत्रकार रविश कुमार लिखतें हैं कि “प्रधानमंत्री के शर्मनाक बयान के बाद कई लोग चुनाव आयोग को खोज रहे हैं। यही चुनाव आयोग की उपलब्धि है कि उसे बार-बार खोजा जा रहा है। प्रधानमंत्री के मसले को लेकर आयोग को खोजेंगे तो साइन बोर्ड भी नहीं मिलेगा। कब से मंदिर और राम के नाम पर वोट माँगा जा रहा है,क्या आयोग ने नहीं सुना होगा?”
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एक ओर पोस्ट में रविश कुमार लिखतें हैं,”प्रधानमंत्री का बयान बता रहा है कि उनकी राजनीति विकास का केवल ढोंग करती है। उनकी राजनीति केवल सांप्रदायिक नफ़रत की बुनियाद पर खड़ी है। दस साल बाद भी वे एक भाषण बिना मुसलमान, मुस्लिम लीग और मछली के नहीं दे सकते। यह बहुसंख्यक वर्ग का भी अपमान भी है। ऐसा लगता है प्रधानमंत्री बहुसंख्यक को भी इसी लायक़ समझते हैं । उसके बच्चे बेरोज़गारी से मरते रहेंगे प्रधानमंत्री उन्हें मुसलमान मुसलमान सुनाते रहेंगे। अफ़सोस।”
